नंबर से जाने जाते हैं इस गौशाला के बछड़े, पुकारने पर हो जाते हैं हाजि‍र

नंबर से जाने जाते हैं इस गौशाला के बछड़े, पुकारने पर हो जाते हैं हाजि‍र

राजधानी के चकगजरिया फॉर्म में खुली गौशाला के बछड़े अपना नंबर सुनते ही हाजिर हो जाते हैं। वो सिर्फ यहां काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा और किसी के भी बुलाने से नहीं आते हैं। बछड़ों को सुबह-शाम गायों का दूध पीने के लिए इसी तरह से नाम लेकर बुलाया जाता है। खास बात है कि जिस नंबर के बछड़े को बुलाया जाता है, झुंड में से वही बाहर निकल कर आता है। यहां के सभी बछड़ों को अपना-अपना नंबर पता है।
50 साल से चल रही है गौशाला
लखनऊ के चकगजरिया फॉर्म में करीब 50 साल से ये गौशाला चल रही है। यहां पर जितनी भी गाय हैं, उनके बछड़ों को जन्म के अनुसार नंबर दिए जाते हैं। इसी नंबर से इन्हें बुलाया भी जाता है। सभी बछड़ों को गायों से अलग एक बाड़े में रखा जाता है। बछड़ों को बांधा नहीं जाता है। इसके बावजूद वे कहीं भी इधर-उधर नहीं जाते हैं। जब सुबह और शाम को गायों को दुहने का समय होता है, तब वे बाड़े के गेट के बाहर आकर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद कर्मचारी एक-एक कर उन्हें नंबर से बुलाता है। जिस बछड़े को नंबर से पुकारा जाता है, वही अंदर आ जाता है।
कर्मचारियों की आवाज पहचानते हैं बछड़े
खास बात ये है कि बछड़े सिर्फ कर्मचारियों के बुलाने पर ही आते हैं। यदि कोई और व्यक्ति उन्हें आवाज दे तो वे नहीं सुनते हैं। गौशाला के इंचार्ज विजय बहादुर बताते हैं कि बछड़े यहां के लोगों की आवाज को अच्छी तरह से पहचानते हैं। यहां पर सभी गायों और उनके बछड़ों को परिवार के सदस्यों की तरह रखा जाता है। Read More…

नंबर से जाने जाते हैं इस गौशाला के बछड़े, पुकारने पर हो जाते हैं हाजि‍र

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